रामनगर सेक्टर से सुपरवाइजर को हटाने की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने मांग
इछावर में न्याय मांगने पहुंचीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिली दुत्कार; सुपरवाइजर पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप, परियोजना अधिकारी ने कार्यकर्ताओं की ही लगा दी क्लास
इछावर। महिला एवं बाल विकास परियोजना इछावर के अंतर्गत आने वाले सेक्टर रामनगर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजर के बीच का विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। सेक्टर सुपरवाइजर द्वारा किए जा रहे कथित अभद्र व्यवहार, बदतमीजी और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता न्याय की गुहार लगाने महिला परियोजना अधिकारी के दफ्तर पहुंची थीं। लेकिन वहां कार्यकर्ताओं को न्याय मिलना तो दूर, उल्टा परियोजना अधिकारी ने उनकी ही क्लास लगा दी और कहा कि 'आप लोग काम नहीं करती होंगी।'
सुपरवाइजर पर बदतमीजी और अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप
परियोजना अधिकारी को सौंपी गई शिकायत में रामनगर सेक्टर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सुपरवाइजर पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सुपरवाइजर बंदना शाहू द्वारा उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया जाता है। बात-बात पर उनके लिए 'ढीठ', 'बेशर्म' और 'कामचोर' जैसे अपमानजनक और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, जिससे वे भारी तनाव में काम करने को मजबूर हैं।
नियमों को ताक पर रख एक ही महीने में बार-बार बैठकें
शिकायत में यह भी बताया गया कि सुपरवाइजर द्वारा नियमों को ताक पर रखकर एक ही महीने में बार-बार बैठकें आयोजित की जाती हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि ये बैठकें निर्धारित सेक्टर स्तर पर न रखते हुए अन्य जगहों पर रखी जा रही हैं, जिससे कार्यकर्ताओं को आने-जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
निरीक्षण के नाम पर सुबह 11 से शाम 5:30 बजे तक बंधक जैसा माहौल
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि निरीक्षण के नाम पर भी उन्हें परेशान किया जा रहा है। सुपरवाइजर जब भी निरीक्षण करने आती हैं, तो सुबह 11:00 बजे से लेकर शाम 5:30 बजे तक कार्यकर्ताओं को जबरन केंद्र पर ही बिठाकर रखा जाता है। इस दौरान उनके साथ प्रशासनिक धौंस जमाते हुए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
अधिकारी के रवैये से कार्यकर्ताओं में आक्रोश
जब प्रताड़ना की शिकार ये महिलाएं अपनी फरियाद लेकर महिला परियोजना अधिकारी के पास पहुंचीं, तो अधिकारी का संवेदनशील रवैया देखने को नहीं मिला। न्याय देने और सुपरवाइजर की जांच करने के बजाय अधिकारी ने कार्यकर्ताओं को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। इस एकतरफा व्यवहार के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि उच्च अधिकारियों द्वारा इस मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें न्याय नहीं दिया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगी।
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