प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ता सीहोर, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन बना किसानों की समृद्धि का आधार
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स्वयं भी प्राकृतिक खेती कर रहीं और अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहीं है कृषि सखी श्रीमती कुंता एवं शकुंतला
प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ता सीहोर, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन बना किसानों की समृद्धि का आधार
सीहोर, 18 दिसंबर, 2025
भारत सरकार के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NFSM) योजना देश के किसानों को रासायनिक खेती से मुक्त कर पर्यावरण-संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और लागत में कमी की दिशा में अग्रसर करने की एक महत्वाकांक्षी पहल है। इस योजना के अंतर्गत सीहोर जिले में अब तक 3125 किसानों का पंजीयन किया जा चुका है, जो प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर जिले के किसानों की बढ़ती जागरूकता और विश्वास को दर्शाता है। योजना के तहत पंजीकृत किसानों को प्राकृतिक खेती को अपनाने हेतु प्रति एकड़ की दर से दो वर्षों तक 04 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है, जिससे किसानों को प्रारंभिक सहयोग और आत्मनिर्भरता का संबल मिल रहा है।
सीहोर विकासखंड के ग्राम काहिरी जदीद निवासी कृषि सखी श्री कुंता धारवे एवं ग्राम सागोनी निवासी श्रीमती शकुंतला गिनोरिया इस योजना की सफलता का एक प्रेरणादायी उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि पहले में वे अपनी जीमन में रासायनिक खेती करती थीं, जिसमें लागत अत्यधिक थी और भूमि का स्वास्थ्य भी लगातार गिरता जा रहा था। इसी दौरान क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी की सलाह पर उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने का निर्णय लिया और अपना पंजीयन कराकर प्राकृतिक खेती की शुरुआत की। श्रीमती कुंता और श्रीमती शकुंतला ने बताया कि वे प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने हेतु कृषि सखी के रूप में भी कार्य कर रही हैं और स्वयं भी अपनी भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रही हैं।
कृषि सखी श्रीमती कुंता और श्रीमती शकुंतला ने बताया कि वर्तमान में प्राकृतिक खेती अपनाने से उनकी खेती की लागत में कमी आई है तथा भूमि की भौतिक संरचना और उर्वरता में भी सुधार हुआ है। आज वे कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रही हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि के साथ-साथ खेती के प्रति आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि भूमि और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी को भी मजबूत किया है।
कृषि सखी श्रीमती कुंता और श्रीमती शकुंतला ने कहा है कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना केवल जैविक खेती को प्रोत्साहित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार और किसानों के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य कर रही है। यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत कृषि विकास की दिशा में एक सशक्त कदम है। सीहोर जिला प्रशासन के सतत मार्गदर्शन और सहयोग से यह योजना जिले में तेजी से सफलता की नई कहानियां गढ़ रही है और आने वाले समय में सीहोर को प्राकृतिक खेती के एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।
सीहोर जिला प्रशासन द्वारा की गई है हाट बाजार लगाने की पहल
कृषि सखी श्रीमती कुंता एवं श्रीमती शकुंतला ने यह भी बताया कि सीहोर जिला प्रशासन द्वारा हाल ही में किसानों के जैविक उत्पादों को बाज़ार उपलब्ध कराने हेतु सीहोर के बाल विहार मैदान में प्रत्येक रविवार को जैविक हाट बाजार लगाने की अभिनव पहल की गई है। यह पहल जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी, क्योंकि यहां वे किसान अपने जैविक कृषि उत्पादों का सीधे विक्रय कर सकते हैं और उन्हें उनके उचित मूल्य भी प्राप्त होंगे। साथ ही उपभोक्ताओं को भी मिलावट रहित, सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य सामग्री उपलब्ध होगी, जिससे किसान और उपभोक्ता के बीच सीधा और भरोसेमंद संबंध स्थापित होगा।
जिले में 10 कृषि सखियां हैं कार्यरत
सीहोर विकासखंड में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 10 प्रशिक्षित कृषि सखियां सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, जो किसानों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, ब्रह्मास्त्र, अग्नियास्त्र, सोया टॉनिक, कंडा टॉनिक जैसे प्राकृतिक जैविक उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रही हैं। ये कृषि सखियां न केवल किसानों को इन जैविक इनपुट्स के निर्माण की तकनीक सिखा रही हैं, बल्कि किसानों के खेतों में इनके उपयोग को भी बढ़ावा देकर प्राकृतिक खेती को जमीनी स्तर पर सफल बना रही हैं।
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