यूक्रेन युद्ध: अमेरिका की मध्यस्थता में रूस&यूक्रेन की जिनेवा में त्रिपक्षीय वार्ता

यूक्रेन में पिछले चार साल से जारी जंग को खत्म करने के लिए एक बार फिर अमेरिका के नेतृत्व में रूस और यूक्रेन की बातचीत होने जा रही है. ये वार्ता स्विट्जरलैंड के जिनेवा में मंगलवार और बुधवार को होगी, जिसमें तीनों देशों के राजनयिक ट्रंप प्रशासन की ओर से दिए गए शांति प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे. इससे पहले यूक्रेन में शांति के लिए त्रिपक्षीय बैठक संयुक्त अरब अमीरात के अबूधाबी शहर में हुई थी, जिसमें नतीजा तो कुछ भी नहीं निकला लेकिन वार्ता जारी रखने पर सहमति जरूर बनी. यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के प्रयासों के तहत अमेरिका के नेतृत्व में रूस और यूक्रेन के बीच जिनेवा में दो दिवसीय त्रिपक्षीय वार्ता होने जा रही है. वार्ता में डोनबास क्षेत्र को लेकर मतभेद सबसे बड़ी चुनौती है.न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक यूक्रेन में जंग खत्म करने को लेकर  रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत अंतिम दौर में है. बस पेच फंसा है यूक्रेन के पूर्वी  क्षेत्र डोनबास को लेकर. रूस चहता है कि डोनबास उसका इलाका बन जाए. लेकिन यूक्रेन अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है.म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता से सकारात्मक नतीजे निकलने की उम्मीद है, हालांकि यूरोप को बातचीत से बाहर रखना एक गंभीर गलती है.वहीं इस बातचीत को लेकर यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की ने उम्मीद जताई कि अमेरिका की मध्यस्थता से होने वाली शांति वार्ता सार्थक होगी म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस पर बोलते हुए जेलेंस्की ने कहा, ‘हम पूरी उम्मीद करते हैं कि अगले हफ्ते होने वाली त्रिपक्षीय बैठकें गंभीर, सार्थक और हम सभी के लिए उपयोगी होंगी.लेकिन सच कहें तो कभी-कभी ऐसा लगता है कि दोनों पक्ष बिल्कुल अलग-अलग विषयों पर बात कर रहे हैं. अमेरिकी अक्सर रियायतों के मुद्दे पर लौट आते हैं, और अक्सर उन रियायतों पर चर्चा केवल यूक्रेन के संदर्भ में होती है, रूस के संदर्भ में नहीं. यूरोप तो बातचीत की मेज पर मौजूद ही नहीं है. मेरे विचार से ये एक बड़ी गलती है.दरअसल अमेरिका यूक्रेन में जंग खत्म करने के लिए रूस से सीधे तौर पर कई दौर की बातचीत कर चुका है. लेकिन इस बातचीत में यूरोपीय देशों को शामिल नहीं किया गया, जिससे ना सिर्फ जेलेंस्की, बल्कि कई यूरोपीय देश भी नाराजगी जता चुके हैं.फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तो कुछ दिन पहले यहां तक कह दिया था कि वॉशिंगटन यूक्रेन के साथ विश्वघात कर सकता है. पश्चिमी मीडिया के मुताबिक मैक्रों ने ये बयान ट्रंप और पुतिन की नजदीकियों की वजह से दिया था. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कई बार रूसी राष्ट्रपति को अपना दोस्त बता चुके हैं. साथ ही ट्रंप ने पिछले साल जनवरी में सत्ता में आने के बाद यूक्रेन को दी जा रही भारी भरकम सैन्य मदद पर रोक लगा दी थी.यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और नाटो में अमेरिकी राजदूत के इस बयान से एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि रूस जंग खत्म करने को लेकर समझौता करने को तैयार है और अगर यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की चाहे तो जल्द ही समझौता हो सकता है.

यूक्रेन युद्ध: अमेरिका की मध्यस्थता में रूस&यूक्रेन की जिनेवा में त्रिपक्षीय वार्ता

यूक्रेन में पिछले चार साल से जारी जंग को खत्म करने के लिए एक बार फिर अमेरिका के नेतृत्व में रूस और यूक्रेन की बातचीत होने जा रही है. ये वार्ता स्विट्जरलैंड के जिनेवा में मंगलवार और बुधवार को होगी, जिसमें तीनों देशों के राजनयिक ट्रंप प्रशासन की ओर से दिए गए शांति प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे. इससे पहले यूक्रेन में शांति के लिए त्रिपक्षीय बैठक संयुक्त अरब अमीरात के अबूधाबी शहर में हुई थी, जिसमें नतीजा तो कुछ भी नहीं निकला लेकिन वार्ता जारी रखने पर सहमति जरूर बनी. यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के प्रयासों के तहत अमेरिका के नेतृत्व में रूस और यूक्रेन के बीच जिनेवा में दो दिवसीय त्रिपक्षीय वार्ता होने जा रही है. वार्ता में डोनबास क्षेत्र को लेकर मतभेद सबसे बड़ी चुनौती है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक यूक्रेन में जंग खत्म करने को लेकर  रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत अंतिम दौर में है. बस पेच फंसा है यूक्रेन के पूर्वी  क्षेत्र डोनबास को लेकर. रूस चहता है कि डोनबास उसका इलाका बन जाए. लेकिन यूक्रेन अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है.
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता से सकारात्मक नतीजे निकलने की उम्मीद है, हालांकि यूरोप को बातचीत से बाहर रखना एक गंभीर गलती है.
वहीं इस बातचीत को लेकर यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की ने उम्मीद जताई कि अमेरिका की मध्यस्थता से होने वाली शांति वार्ता सार्थक होगी म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस पर बोलते हुए जेलेंस्की ने कहा, ‘हम पूरी उम्मीद करते हैं कि अगले हफ्ते होने वाली त्रिपक्षीय बैठकें गंभीर, सार्थक और हम सभी के लिए उपयोगी होंगी.
लेकिन सच कहें तो कभी-कभी ऐसा लगता है कि दोनों पक्ष बिल्कुल अलग-अलग विषयों पर बात कर रहे हैं. अमेरिकी अक्सर रियायतों के मुद्दे पर लौट आते हैं, और अक्सर उन रियायतों पर चर्चा केवल यूक्रेन के संदर्भ में होती है, रूस के संदर्भ में नहीं. यूरोप तो बातचीत की मेज पर मौजूद ही नहीं है. मेरे विचार से ये एक बड़ी गलती है.
दरअसल अमेरिका यूक्रेन में जंग खत्म करने के लिए रूस से सीधे तौर पर कई दौर की बातचीत कर चुका है. लेकिन इस बातचीत में यूरोपीय देशों को शामिल नहीं किया गया, जिससे ना सिर्फ जेलेंस्की, बल्कि कई यूरोपीय देश भी नाराजगी जता चुके हैं.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तो कुछ दिन पहले यहां तक कह दिया था कि वॉशिंगटन यूक्रेन के साथ विश्वघात कर सकता है. पश्चिमी मीडिया के मुताबिक मैक्रों ने ये बयान ट्रंप और पुतिन की नजदीकियों की वजह से दिया था. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कई बार रूसी राष्ट्रपति को अपना दोस्त बता चुके हैं. साथ ही ट्रंप ने पिछले साल जनवरी में सत्ता में आने के बाद यूक्रेन को दी जा रही भारी भरकम सैन्य मदद पर रोक लगा दी थी.
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और नाटो में अमेरिकी राजदूत के इस बयान से एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि रूस जंग खत्म करने को लेकर समझौता करने को तैयार है और अगर यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की चाहे तो जल्द ही समझौता हो सकता है.