कलेक्टर ने की कृषि, सहकारिता, उद्यानिकी, मत्स्य एवं पशुपालन विभाग की गतिविधियों की समीक्षा
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कलेक्टर ने की कृषि, सहकारिता, उद्यानिकी, मत्स्य एवं पशुपालन विभाग की गतिविधियों की समीक्षा
योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक न रहे सीमित - कलेक्टर
कृषि और उससे जुड़े विभाग जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं - कलेक्टर
कलेक्टर श्री बालागुरू के. की ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक आयोजित कर कृषि, सहकारिता, उद्यानिकी, मत्स्य, मार्कफेड एवं पशुपालन की गतिविधियों एवं कार्यप्रगति की गहन समीक्षा की। बैठक में कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय-सीमा में पहुँचना चाहिए और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक विलंब स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फील्ड स्तर पर निगरानी मजबूत की जाए और योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका प्रभाव सीधे किसानों और आमजन के जीवन में दिखाई दे।
कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान रबी वर्ष 2025-26 की फसल स्थिति, बीज एवं उर्वरक व्यवस्था, गुणवत्ता नियंत्रण तथा विभिन्न योजनाओं की प्रगति प्रस्तुत की गई। जिले में रबी फसलों का कुल क्षेत्रफल लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत पूर्ति के साथ 395.20 हजार हेक्टेयर दर्ज किया गया, जिसमें गेहूं का क्षेत्रफल 101 प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रमुख रहा। बीज वितरण की स्थिति में निजी एवं सहकारी माध्यमों से गेहूं, चना, मसूर, सरसों सहित प्रमुख फसलों के लिए 1.09 लाख क्विंटल से अधिक बीज का वितरण किया गया। उर्वरक व्यवस्था के अंतर्गत यूरिया, डीएपी, एसएसपी एवं अन्य उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करते हुए 1.73 लाख मैट्रिक टन से अधिक का वितरण किया गया। ई-विकास योजना के अंतर्गत जिले के सभी 313 सहकारी एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं का ऑनबोर्ड होना जिले की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। गुणवत्ता नियंत्रण अभियान के तहत उर्वरक, बीज एवं कीटनाशकों के नमूनों की नियमित जांच कर अमानक पाए जाने पर विक्रय प्रतिबंध, लाइसेंस निलंबन एवं अन्य वैधानिक कार्यवाही की गई, जिससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण आदान उपलब्ध कराने में मदद मिली
बैठक में बताया गया कि जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जागरूकता अभियान, कृषि रथ, पंपलेट वितरण एवं अनुदान पर हेप्पी सीडर व सुपर सीडर जैसे यंत्र उपलब्ध कराए गए। प्राकृतिक खेती के तहत 25 क्लस्टरों का गठन कर 3125 किसानों का चयन किया गया तथा 17 बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर स्थापित किए गए, जिनके माध्यम से जीवामृत, जैविक आदानों एवं प्रशिक्षण की सुविधा किसानों को मिल रही है। इससे मृदा स्वास्थ्य, उत्पादन और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा मिल रहा है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में भावांतर योजना के अंतर्गत सोयाबीन उपार्जन में जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की, जिसमें 1.75 लाख मैट्रिक टन से अधिक सोयाबीन की खरीदी की गई।
उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा जिले के उद्यानिकी रकबे, उत्पादन, प्रस्तावित क्षेत्र विस्तार तथा विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी गई। एकीकृत बागवानी विकास मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना एवं पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत वित्तीय एवं भौतिक प्रगति संतोषजनक रही। विभागीय रोपणियों के सुदृढ़ीकरण, तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता और नवाचार आधारित गतिविधियों पर विशेष जोर दिया गया। पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत जिले के उद्यमियों की सफलता की कहानियां भी प्रस्तुत की गईं, जिनसे किसानों की आय में वृद्धि और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बल मिला।
सहकारिता विभाग की समीक्षा में रबी 2024-25 की स्थिति, खरीफ 2026 की कार्ययोजना, पैक्स के पुनर्गठन, बी-पैक्स कंप्यूटरीकरण, ई-पैक्स एवं ईआरपी एंट्री की प्रगति पर चर्चा की गई। जिला सहकारी बैंक सीहोर की वित्तीय स्थिति को मजबूत बताते हुए जानकारी दी गई कि बैंक 5.57 करोड़ रुपये के वार्षिक लाभ में है तथा नाबार्ड से 4.5 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर पुनर्वित्त के लिए पात्र है। पैक्स के व्यवसाय विविधीकरण, जनऔषधि केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर, पेट्रोल-डीजल पंप एवं बहुउद्देशीय गतिविधियों के माध्यम से सहकारी संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं
मत्स्य विभाग की समीक्षा में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना एवं मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के अंतर्गत वित्तीय एवं भौतिक प्रगति प्रस्तुत की गई। जिले में मत्स्य बीज उत्पादन लक्ष्य का 90 प्रतिशत और मत्स्योत्पादन लक्ष्य का 74 प्रतिशत जनवरी 2026 तक हासिल किया गया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में 93 प्रतिशत तथा मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना में 97 प्रतिशत तक राशि व्यय कर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाया गया। इसके साथ ही तालाब निर्माण, इनपुट सहायता एवं अन्य गतिविधियों से मछुआ समुदाय की आजीविका सुदृढ़ हो रही है
बैठक में कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपसी समन्वय के साथ योजनाओं की पुष्टि, फील्ड सत्यापन और हितग्राही संतुष्टि को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि कृषि और जुड़े विभाग, विभाग जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इनके सशक्त क्रियान्वयन से ही किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण रोजगार और समग्र विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती सर्जना यादव, कृषि उप संचालक श्री अशोक कुमार उपाध्याय, उद्यानिकी विभाग सहायक संचालक श्री जगदीश मुजाल्दा, पशुपालन विभाग के अधिकारी श्री आरपी गौतम, मत्स्य विभाग के अधिकारी श्री प्रशांत हर्ष, सहकारिता विभाग के अधिकारी श्री सुधीर कैथवास सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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