आज कुबेरेश्वरधाम पर लगाया जाएगा 51 सौ तिल-गुड के लड्डूओं का भोग

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आज कुबेरेश्वरधाम पर लगाया जाएगा 51 सौ तिल-गुड के लड्डूओं का भोग

आज कुबेरेश्वरधाम पर लगाया जाएगा 51 सौ तिल-गुड के लड्डूओं का भोग
कुबेरेश्वरधाम पर हजारों की संख्या में आए श्रद्धालुओं का प्रसादी का किया वितरण
सीहोर। हर साल की तरह इस साल भी जिला मुख्यालय स्थित कुबेरेश्वरधाम पर मकर संक्रांति का पर्व आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस मौके पर अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में करीब 51 सौ तिल-गुड के लड्डूओं का भोग लगाकर यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया जाएगा। संक्रांति पर्व को लेकर आधुनिक भोजनशाला में तैयारियां की जा रही है। यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन-प्रसादी के अलावा नुक्ती, मिठाई, लड्डू, नमकीन और खिचड़ी आदि की व्यवस्था की गई है। मंगलवार को मंदिर के व्यवस्थापक पंडित समीर शुक्ला, पंडित विनय मिश्रा सहित अन्य ने यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया और विठलेश सेवा समिति ने यहां पर आगामी दिनों में होने वाले रुद्राक्ष महोत्सव की तैयारियों की रुपरेखा बनाई।
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि मकर संक्रांति का त्योहार देश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। खास बात यह है कि इस त्योहार को देश के हर हिस्से में अलग-अलग नामों और तरीके से मनाया जाता है। दरअसल, मकर संक्रांति का त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। साथ ही, यह नई फसल की कटाई का प्रतीक भी माना जाता है। जनवरी के महीने में फसलों की कटाई से जुड़े त्योहार पूरे भारत में इस त्योहार को बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है, लेकिन इनके नाम और रिवाज काफी अलग होते हैं। कुबेरेश्वरधाम पर अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित श्री मिश्रा के मार्गदर्शन में पर्व मनाया जाएगा। इस दिन खिचड़ी बनाना, खाना और दान करना एक पुरानी परंपरा है। यही कारण है कि मकर संक्रांति का नाम आते ही खिचड़ी का स्मरण स्वत: हो जाता है। परंपरा के पीछे केवल स्वाद नहीं, बल्कि गहरी आस्था और सामाजिक भावना जुड़ी मानी जाती है। इसलिए हर साल यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी लड्डूओं के साथ खिचड़ी प्रदान की जाती है।